
रचनाकार सुनील कुमार खुराना नकुड़ सहारनपुर उत्तर प्रदेश
रक्षाबंधन की रस्म पुरानी,
त्योहार की सच्ची कहानी।
यह राखी का रिश्ता प्यारा,
बना है रिश्ता सबसे न्यारा।।
धागे का नहीं बना है बंधन,
महक है शीतल जैसे चंदन।
सच है प्यार भाई-बहन का,
रिश्ता जैसे इत्र से फूल का।।
बहना बदलें में कुछ न मांगे,
दुआ करती है भाई के भागे।
यह बन्धन है प्यारा रक्षासूत्र,
निभाएं वह होता सच्चा पुत्र।।
बन्धन बनता है याद दिलाता,
बनता संस्कार सब सिखाता।
श्रावण मास में खुशियां लाता,
ये रक्षाबंधन सबके मन भाता।।
स्वरचित और मौलिक कविता
सर्वाधिकार सुरक्षित
सुनील कुमार खुराना
नकुड़ सहारनपुर उत्तर प्रदेश













