
विधा : पद्य
रक्षाबंधन का यह रीति ,
भाई बहनों की है प्रीति ,
भाई बहनों का है प्यार ,
हिंद का है पावन नीति ।
ये रक्षाबंधन का त्यौहार ,
हिंदू जैनों का व्यवहार ,
प्रेम में लगते चाॅंद चार ,
हिंद का पावन आचार ।
सनातन जैनों की कृति ,
न हो इसका कभी इति ,
रिश्ते को बनाए सुगंधित ,
जैसे सुगंधित स्वाद घृति ।
राखी शोभे भ्रात कलाई ,
राखी रिश्ते का है मलाई ,
भाई बहन हों प्रफुल्लित ,
भाई बहन आते रहें धाई ।
बना रहे दोनों का प्यार ,
जीवन जिऍं वर्ष हजार ,
न आए रिश्ते में ही दरार ,
न कोई किसी से किनार ।
अरुण दिव्यांश
छपरा ( सारण )
बिहार ।













