Uncategorized
Trending

मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम एवं योगेश्वर श्री कृष्ण : जीवन वृत्त

अच्युतम केशवम, कृष्ण दामोदरम,
रामनारायणम, जानकीवल्लभम,
राम जन्में थे त्रेता में दशरथ के घर,
कृष्ण जन्मे थे द्वापर में कारागार में।

राम का अवतार, प्राप्त वर से हुआ,
कृष्ण जन्मे, कंस को मिले श्राप से,
राम जीवन भर वन वन भटकते रहे,
कृष्ण महलों की शोभा बढ़ाते रहे।

लीला निराली है प्रभू की, राम अब,
तक, मंदिर महल को तरसते रहे,
मथुरा में जन्मभूमि अब भी है न्यारी,
कृष्ण पहले भी महलों में रहते रहे।

रावण भवसागर उतरने चला,
श्रीराम ने मानव अवतार लिया।
“प्राण जायँ पर वचन न जाये”
रघुकुल रीति ने बाँध लिया।

कृष्ण मर्यादा व वचन पालन,
की रीति, नीति में नहीं बँध सके।
बृज़ भूमि को छोड़, द्वारका बसे,
वापस आने का वादा निभा ना सके।

श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम बने,
श्री कृष्ण धर्म के रक्षक बने,
राम सीता वियोग में जलते रहे,
कृष्ण राधा, रुक्मिणी संग संग रहे।

कृष्ण हित में शक्तिस्वरूपा
ने बालिका रूप में जन्म लिया,
बाल कान्हा मथुरा से गोकुल गए,
बालिका ने स्वयं बलिदान दिया।

कृष्ण गोकुल में माखन खाते रहे,
गोपिकाओं संग रास रचाते रहे,
राम राक्षसों से ऋषियों को,
उनके आश्रम में जाकर बचाते रहे।

भक्त मीराजी थीं भक्त शबरी भी थी,
कृष्ण मीरा को नाच नचाते रहे,
प्रभु दर्शन को सदा तरसाते रहे,
राम शबरी के झूठे बेर खाते रहे।

कृष्ण अर्जुन के रथ सारथी बने,
उपदेश गीता के स्वयं सुनाते रहे,
आदित्य उधर राम को देखिए,
मरते रावण से गुरू ज्ञान पाते रहे।

राम से मर्यादा सीखिए सदा,
कृष्ण से राजनीति के मर्म को,
अच्युतम केशवम, कृष्णदामोदरम,
रामनारायणम, जानकी वल्लभम।

डॉ कर्नल आदिशंकर मिश्र
‘आदित्य’, ‘विद्यावाचस्पति’
‘विद्यासागर’, लखनऊ

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *