
नित नव फरमान सुनाते हो
बात न्याय संगत जो करता,उसको ही बस धमकाते हो।
सत्ता की कुर्सी पर बैठे, नित नव फरमान सुनाते हो।।
अधिक दिनों तक नहीं चलेगी, अतिवादी सरकार तुम्हारी।
नहीं भूल कर कभी मिलेगी, तुमको मोदी वोट हमारी।
सत्ता पाने की तुमको अब,लगता है चढ़ गई खुमारी।
कुर्सी के लालच में आकर,भूल गए हो दुनियादारी।
अहंकारवश जन समूह पर, निर्मम लाठी चलवाते हो।
सत्ता की कुर्सी पर बैठे, नित नव फरमान सुनाते हो।।
जातिवाद की बातें करके, लोगों को बस लड़वाते हो।
दीन हीन निर्धन के ऊपर,अपना बस हुकुम चलाते हो।
एक जाति का पक्ष लेते हो,दूजे से बैर निभाते हो।
सत्ता मद में डूबे रहते,जनता को आँख दिखाते हो।
जो भी जाता न्याय माँगने,उसको ही डाँट भगाते हो।
सत्ता की कुर्सी पर बैठे, नित नव फरमान सुनाते हो।।
बातें करते बड़ी-बड़ी पर, कार्य न ढंग का करते हो।
लूट देश का पैसा सारा, खुद की अलमारी भरते हो।
सिर्फ अमीरों की सुनते हो, नहीं असहाय की सुनते हो।
बने हितैषी निर्धन फिरते, पर निर्धन को ही छलते हो।
जिनके दम पर सत्ता पाई,उनको ही आँख दिखाते हो।
सत्ता की कुर्सी पर बैठे, नित नव फरमान सुनाते हो।।
अगड़ा पिछड़ा की बातें कर, तुमने सरकार बनाई है।
खुद की जेबें भरी हमेंशा,कभी की न दीन भलाई है।
बेंच-बेंच कर देश संपदा,काटी बस खूब मलाई है।
हिन्दू से हिन्दू लड़वाकर,उर में नफरत फैलाई है।
झूठी बातों में भरमाकर,अपना बस काम बनाते हो।
सत्ता की कुर्सी पर बैठे,नित नव फरमान सुनाते हो।।
जिसने तुमको अपना माना, अपना सब तुम पर वार दिया।
हर दल के नेता से ज्यादा,मोदी जी तुमको प्यार दिया।
खत्म हो चुकी बीजेपी को, जिसने नवीन आधार दिया।
जाति आरक्षण यूजीसी ला, तुमने उनको ही मार दिया।
जिसने राजा तुम्हें बनाया,उसको ही आज सताते हो।
सत्ता की कुर्सी पर बैठे,नित नव फरमान सुनाते हो।।
राम जी तिवारी"राम"
उन्नाव (उत्तर प्रदेश)













