
इन अखियों में राधाकृष्ण बसे है
कोई अन्य कहाँ से आए समाई
जब से जन्म लिया इस जग में
लक्ष्मी नारायण रूप में दिए दिखाई
राधाकृष्ण की बात करूँ मैं –
हर तरफ हर्षित दिखूँ दिखाई
मेरे सपने पूरे करते हो
हरते पीड़ा हमाई
मन में कोई गलत बात आए न
न कभी होने देते मेरी जग में हँसाई
मन मन स्मरण करती आपका
अपनों में हर तरफ देते आप दिखाई
मेरे जीवन के आदि अन्त तक
और अनन्त तक
आँखों में रहोगे सदैव समाई
मेरे जीवन की हर परीक्षा में
हाथ पकड़ कर जीत ही जीत दिलाई
अब तो मुझे बता दो राधा कृष्ण
कैसे करूँ आपकी बढ़ाई
यह बात मुझे क्यों नहीं समझ आई
हे मेरे राधा कृष्ण जी आप हो
मेरे अन्तस् की परछाई
शीलू जौहरी भरूच













