
मुझसे उसका नाम बड़ा है।
मुझको इससे लेना क्या है।
जीत हमेशा होगी उसकी,
अफ़वाहों से कौन डरा है।
वो कैसे बिल्ली पालेगा,
जिसने तोता पाल रखा है।
पहले ही तासीर है कड़वी,
और करेला नीम चढ़ा है।
भूख मिटेगी किससे किसकी,
दाने -दाने पर लिक्खा है।
उसको डर है खो जाने का,
जिसको ज़्यादा साथ मिला है।
साथ हमारे दूर सफ़र में,
कौन पराया कौन सगा है।
सबकी अपनी-अपनी हस्ती,
अपना-अपना फ़न, रुतबा है।
नवीन माथुर पंचोली
अमझेरा धार मप्र













