
जब अपने ही घर में चोर हो तो बाहर से ताला लगाने का कोई मतलब नहीं बनता है साहेब,
क्योंकि आज कल अपने ही घर वालें अपने ही घर वालों को छलकर उछलता है साहेब,
इस लिए हम बाहर वालों के चोरों के बारे में कभी कुछ भी सोच नहीं सकतें हैं साहेब,
क्योंकि आज कल के लोग अपनों में ही इतना उलझा हुआ है कि सुलझा नहीं सकता
क्योंकि बाहर बाला चोर चोरी करके भाग जाता है लेकिन हम सिर्फ सोचते रहतें हैं ,
लेकिन घर बाले चोर घर में ही चोरी करता रहता है लेकिन हम उसको समझ नही पातें हैं,
बस इतनी सी बात है साहेब जो हर किसी को समझ में नहीं आता है,
चन्दे पासवान उर्फ अलबेला जी मधुबनी बिहार से,













