
ज़िंदगी से लड़ी हूँ तुम्हारे बिना,
हर खुशी भी मिली है अधूरी-सी यहाँ।
रास्ते तो बहुत थे, मगर दिल ने फिर,
तुम्हारी यादों को ही अपना साथी कहा।
रात चुप थी, सितारे भी खामोश थे,
फिर भी आँखों ने तुम्हारा पता पूछ लिया।
वक़्त गुज़रता रहा, दर्द कम न हुआ,
दिल ने हर मोड़ पर तुझको ही याद किया।
अब जो सीखा है मैंने अकेले चलना,
तुम्हारे जाने ने मुझको ख़ुद से मिला दिया।
ज़िंदगी से लड़ी हूँ तुम्हारे बिना,
फिर भी साँसें चली हैं तुम्हारे सिवा।
जिसको अपना समझकर सजाया था दिल,
वो भी खाली रहा है तुम्हारे बिना।
चाँद निकला तो आँखें नम हो गईं,
रात ढलती रही है तुम्हारे बिना।
लोग कहते हैं वक़्त सब भर देता है,
कुछ कमी रह गई है तुम्हारे बिना।
अब किसी से शिकायत भी करती नहीं,
बस ये दिल चुप रहा है तुम्हारे बिना।
तुम अगर लौट आओ तो शायद लगे,
ज़िंदगी फिर से ज़िंदगी है तुम्हारे बिना।
रीना पटले शिक्षिका
शासकीय हाई स्कूल ऐरमा कुरई
जिला-सिवनी मध्यप्रदेश













