
प्राकृतिक आपदा भी मानों कलियुग का कहर है,
प्रकृति से छेड़खानी भी हमारे लिये जहर है।
कटते हुए पेड़ पौधे भी हमसे पूछते हैं,
क्या जानों कि किन कठिनाइयों से हम जूझते हैं।
प्रकृति हमसे पूछती है, कि क्यों दूषित किया हमको,
इसका दुष्परिणाम भी भुगतना पड़ेगा तुमको।
जब आपदा आएगी तो जन सैलाब आएगा,
अच्छे -बुरे, बड़े -छोटे सभी को साथ ले जाएगा।
काम आएगी ना धन संपत्ति ना ही झूठी शान,
आने वाले समय में सोच फिर क्या होगा इंसान।
आने वाले समय में कलियुग भी साथ चलेगा,
यही आपदा भूकंप और बाढ़ का रौद्र रूप ले लेगा।
इस आपदा से वही बचेगा जो भगवत शरण में जायेगा,
बाल ना बांका होगा उसका जो संकीर्तन गायेगा।
तो आओ साथियो मिल जुलकर भगवत शरण में जाएँ,
और इस संसार को हम प्राकृतिक आपदा से बचाएँ।
पूर्णपावन कृति
सराईपाली छत्तीसगढ़













