
किस कल का निर्माण करेंगे
बेघर भूखे नंगे लोग
कफ़न हुयी चेहरों की रंगत
मरघट सी घर की बुनियादें
गाँव डूबते सैलाबों में
धुआँ बनी शहरों की बातें
आश्वासन की बैतरणी में
तिनके तिनके बहते लोग
लहू नहायी मन की भाषा
गीतों की गलियाँ वीरानी
धरती के सौदागर कितने
बेच रहे संतों की बानी
मज़हब की हिस्से दारी में
टुकड़े टुकड़े बँटते लोग
लक्ष्मी का वाहन उल्लू है
सूरज की कैसी प्रत्याशा
चूस रही है प्राण नसों से
सिंहासन की रक्त पिपासा
लोक तंत्र के प्रहरी होंगे
गूँगे अंधे बहरे लोग
के वी











