
जिस राह पर चलना
हमारे लिए केवल विचार है,
उस राह पर तपस्वी
अपने संकल्प से चलते हैं।
अन्न से अधिक आत्मबल को,
सुविधा से अधिक साधना को,
और देह से अधिक आत्मा को
महत्व देकर किया गया
आपका तप
निश्चय ही वंदनीय है।
आपके संयम की दृढ़ता,
त्याग की निर्मलता और
साधना की ऊँचाई को
हृदय से नमन।
आपके तप की हृदयपूर्वक अनुमोदना।
आपकी साधना आत्मकल्याण की ओर अग्रसर हो। 🙏
छाया शाह ‘सख्य’ मुंबई(कच्छ)













