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सूरीनाम में हिंदी दिवस समारोह में सांद्रा लुटावन गणेश की कृति का लोकार्पण

पारामारिबो, सूरीनाम। भारतीय दूतावास के तत्वावधान में १४ सितंबर को स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र, पारामारिबो में हिंदी दिवस समारोह हर्षोल्लास एवं साहित्यिक गरिमा के साथ आयोजित किया गया। समारोह में हिंदी भाषा, साहित्य और संस्कृति के प्रति सूरीनामवासियों की आत्मीयता एवं सक्रिय सहभागिता विशेष रूप से दिखाई दी।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारतीय राजदूत सुभाष गुप्ता रहे। उन्होंने हिंदी की समृद्ध परंपरा और उसके वैश्विक विस्तार पर प्रकाश डालते हुए हिंदी परिषद के प्रयासों की सराहना की तथा प्रतिभागियों को हिंदी के प्रचार-प्रसार को और व्यापक बनाने के लिए प्रेरित किया।

इस अवसर पर पारामारिबो, सूरीनाम दक्षिण अमेरिका की प्रतिभासंपन्न हिंदी साहित्यकार श्रीमती सांद्रा लुटावन गणेश जी की कृति ‘ओढ़नी में लिपटी कविताएँ’ का लोकार्पण भारतीय राजदूत सुभाष गुप्ता द्वारा किया गया। यह अवसर सूरीनाम की धरती पर हिंदी साहित्य की सृजनात्मक उपस्थिति को रेखांकित करने वाला महत्वपूर्ण क्षण रहा।

‘ओढ़नी में लिपटी कविताएँ’ एक विशिष्ट त्रिभाषी काव्य-संग्रह है, जो देवनागरी, रोमन और डच तीनों लिपियों में प्रकाशित हुआ है। सांद्रा लुटावन गणेश की यह साहित्यिक कृति भाषायी विविधता के बीच हिंदी की भाव-संपदा को पाठकों तक पहुँचाने का सुंदर प्रयास है। अंतरराष्ट्रीय हिंदी संगठन, नीदरलैंड की विद्यार्थी के रूप में उनकी साहित्यिक सक्रियता हिंदी के अंतरराष्ट्रीय स्वरूप को भी अभिव्यक्त करती है।

हिंदी दिवस समारोह में कविता पाठ, स्वरचित रचनाओं की प्रस्तुति तथा रोचक प्रश्नोत्तरी का आयोजन किया गया। हिंदी पखवाड़ा के अंतर्गत निबंध लेखन, ज्ञान प्रतियोगिता, कार्यालयीन कार्य प्रतियोगिता और काव्य पाठ प्रतियोगिता में भारतीय मूल के नागरिकों, विद्यार्थियों तथा स्थानीय सूरीनामी नागरिकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। समारोह के समापन पर विजेताओं एवं प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र और पुरस्कार प्रदान कर सम्मानित किया गया।

सूरीनाम की धरती पर हिंदी दिवस का यह आयोजन केवल एक भाषा-दिवस का उत्सव न होकर हिंदी की वैश्विक यात्रा, साहित्यिक सृजन और भारतीय सांस्कृतिक विरासत से जुड़े आत्मीय संबंधों का उत्सव बनकर सामने आया। विशेष रूप से सांद्रा लुटावन गणेश की कृति का लोकार्पण सूरीनाम में हिंदी साहित्य की निरंतर सृजनधारा को नई पहचान देने वाला उल्लेखनीय प्रसंग रहा।

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