Uncategorized
Trending

प्रभाती वंदन के साथ चंद दोहा मुक्तक

चहुंँ दिशि में होती सदा, तेरी जय जयकार।
भक्ति भाव उर धारकर, आई तेरे द्वार।
मात-पिता परिवार हो, तुम लक्ष्मी के नाथ,
भव से नैया पार हो,ऐसा दो उपहार।‌।

गुरु बिन मिलता है नहीं, जीवन में सुख भोग।
ज्ञान ज्योति की पुंज हैं, रचते शुभ संयोग।
मिटा हृदय के दोष को, काटे तम का बंध,
महिमा जग विख्यात है, नमन करें सब लोग।।

मिले मुक्ति संताप से, जड़ता होती दूर।
उन्नति पथ पर बढ़ चलें, जग में हों मशहूर ।
अवगति के बंधन कटें, मिले जगत में कीर्ति,
सत्संगति के फायदे, अहम भाव हो चूर।।

पाने की अति लालसा,दे मानव तू छोड़।
चमक-दमक जग जो बढ़ी,इससे मुख को मोड़।
करते चल शुभ कर्म नित, फल देंगे भगवान,
उर श्रद्धा विश्वास भर,प्रभु से नाता जोड़।।

डॉ गीता पांडेय अपराजिता
सलोन रायबरेली उत्तर प्रदेश

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *