
चलना है अविराम, कहीं तो मिले किनारा।
बहना हो उद्देश्य, कहे नदिया की धारा।।
मन में हो उत्साह, बनाए रख अभिलाषा।
हार-जीत का द्वंद, यही जीवन परिभाषा।।
गढ़ते सपने रोज, चलो साकार करें हम।
जला दीप मन प्राण, जोत हो कभी न मद्धम।।
यात्री का है काम, सदा बढ़ते ही जाना।
मिला तुम्हें दायित्व, शुद्धता भाव निभाना।।
कटुता भरता बोझ, बीच रिश्तों के जानो।
आजीवन ही क्रोध, लोभ को हरदम छानो।।
कठिन नहीं आवेश, नियंत्रण सब कर पाना।
मिलकर समझो कर्म,भाग्य का ताना-बाना।।













