
बहुत करीब से देखा है मैंने रिश्तों को बदलते हुए,
अब किसी का साथ उम्र भर का पक्का नही
लगता,
ये झूठे चेहरों का मेला अब मुझे सच्चा नही
लगता,
नफ़रत नही किसी से अब बस कोई मुझे अच्छा नही लगता,
कहने को तो सब अपने हैं पर अब सबके बीच रह कर भी कोई अपना नही लगता,
सच पूछो तो सब कहने को तो दिल के साफ हैं
पर दिल कहता है कोई साफ नही
दिखता,
किसी ने सच कहा है
जब तब सच्चाई नहीं होती तो यूँ ही कोई बेवफ़ाई नही करता झूठ के पैर से ही पहचान लिया जाता है।
के वी












