
जन्म लेना एक मनुष्य रूप में,
अपने में बड़ा सौभाग्य होता है,
सभी प्राणियों के जन्म से मानव
का ही जन्म सर्व श्रेष्ठ होता है।
दो अक्तूबर का दिन आया है,
गाँधी जी की याद दिलाता है,
दो अक्तूबर के दिन को भारत
गाँधी जयंती के रूप में मनाता है।
इस दिन भारत में दो महापुरुष,
गाँधी जी व शास्त्री जी जन्मे थे,
शांति अहिंसा एक का था ज्ञान,
दूजे का जयजवान जयकिसान।
गाँधी जी ने अपनी हत्या के वक्त
मरने से पहले हे राम ! कहा था,
शास्त्री जी ने देश के बाहर जाकर
ताशकंद में हृदय आघात सहा था।
उनकी क़ुर्बानियाँ हम भूल चुके हैं,
नाममात्र के लिए जयंती मना रहे,
राजनीति वश गाँधी-शास्त्री जी को
भारतवासी क्या क्या नहीं कह रहे।
जिनके पीछे सारा जग चलता था,
जिनके लिये हर मस्तक झुकता था,
आदित्य निवेदन है हर भारतीय से,
मत भूलो एहसान दोनों महापुरुषों के।
डॉ कर्नल आदिशंकर मिश्र
‘आदित्य’, ‘विद्या वाचस्पति’
‘विद्यासागर’, लखनऊ












