
कृपा कर मातु में आया,
शरण तेरी हे जगदंबे!
तेरे चरणों में भक्ति पुष्प,
अर्पित करता हूं अंबे।।
सभी के कष्ट हरती माँ,
पुकारे पुत्र जब तिहारे।
सदा कल्याण करती हो,
शरण रहते भक्त प्यारे।।
नव रूपों में तुम आ के,
भक्त उपकार करती हो।
जो पापी है बुराई का,
दमन संहार करती हो।।
विदित है वध किये तुमने,
मधु कैटभ से दानव का,
दमन करो शस्त्र ले मैया,
धरा पे पापी मानव का।।
दया दृष्टि सभी पर हो,
यही अरदास माँ मेरी।
सदा खुशहाल हो जीवन,
जो मिल जाय कृपा तेरी।।
सभी का धन्य जीवन हो,
भाव भरा भगवती भक्ति।
प्रतिष्ठा फिर से मिल पाय,
जो वंचित है मातृ शक्ति।।
हे अंबे मांगते हम सब,
जगा माँ सब में अनुरक्ति।
जिए सब मान समता से,
अजेय हो बालिका शक्ति।।
भगवान दास शर्मा “प्रशांत”
शिक्षक सह साहित्यकार
इटावा उत्तर प्रदेश












