
गज़ल
जादू भरी ये रातें है,
जादू भरी तेरी ये आंखें हैं,
जादू भरी हुई जिंदगी,
जादू भरी ये राहें हैं,
सबको पता है,
तू कौन है,
सबको पता है,
मैं कौन हूं,
तुम किसी को कुछ ना कहना,
मैं भी आज से मौन हूं,
तेरी जुदाई शायरी में,
उलझा हुआ हुं मैं , आजकल,
कहां जाऊं मैं तूझ को छोड़कर,
जादूगरी में उलझीं बांहें हैं।।
अशोक सुमन भवानी मंडी (राज.)












