
तेरे कामिनी-मुख की चंचलता पर
मेघ भी इतराता है,
हवा के झोंके से वह
तेरे अंगों को छू जाता है।
तुम्हारी मृगनयनी कजरारी आँखों में
जब प्रेम बस जाता है, तब
चाँद भी शरमा जाता है।
पल में रूठना, कभी मज़ाक, कभी बेबाक-सी बातें,
मेरे कानों में तेरी पायल की
छम-छम हर लेती हर ग़म।
तेरा तितलियों-सा उड़ना,
दूर जाकर अट्टहास करना,
तेरी जुल्फ़ों की झटकन से
बादल जब घबरा जाता है, तब
चाँद भी शरमा जाता है।
शाम में जलते दीपों के बीच
तेरा गुनगुनाना, मुस्कुराना,
अठखेलियाँ करना, दीपों को सजाना,
मेरे मन को आह्लादित, तरंगित करता है।
तेरी मौजूदगी से चाँदनी भी
फीकी पड़ जाती है,
तेरा चंद्रमुखी रूप देखकर
फ़लक जब घबरा जाता है, तब
चाँद भी शरमा जाता है।
तेरी आँखों की हया में,
तेरी खामोशी में ही मेरा संसार बसता है,
जिसमें अनकहे शब्दों की एक मधुर श्रृंखला है।
तेरी जुल्फ़ों की छाँव में
सावन की घटा-सी ठंडक,
और बर्फ़ीली हवाएं
मन को शीतलता देती है।
तुम जब पास होती हो,
तो वक़्त भी ठहर जाता है,
तेरे रूप की छटा देखकर
फ़लक मुस्कुराता है, तब
चाँद भी शरमा जाता है।
रवि भूषण वर्मा
राँची झारखंड












