
हिंदी है भारत की पहचान,
हिंदी से बढ़ता देश का मान।
शब्दों में इसके संस्कार हैं,
भारत के सुंदर विचार हैं।
जन-जन को हिंदी जोड़ रही,
नई चेतना मन में भर रही।
साहित्य की यह पावन धारा,
भारत का गौरव सबसे न्यारा।
हिंदी के साधक सम्मानित हों,
उनके प्रयास सदा जीवंत हों।
लेखनी से जो दीप जलाएँ,
हिंदी का गौरव और बढ़ाएँ।
संस्थापक डॉ. कुंडल विजय कुमार का,
हिंदी-सेवा को नमन हमारा।
भाषा से बने सशक्त भारत,
हिंदी से गौरवान्वित हो भारत।
रचनाकार
कौशल
मुड़पार चु पोस्ट रसौटा तहसील पामगढ़ जिला जांजगीर-चांपा छत्तीसगढ़












