
जीते जी तो पूछा नही,लोग तिरछी नजर से देखता रहा,
कष्ट मे रहे,दुख सहे,परेशानी को,खुद मे ही सहता रहा,
मरे जब आज तो,वही लोग सबसे आगे आगे रहा,
सबसे कहता फिरा कि,इसान ये बडा अच्छा रहा ।
कभी किसी से कोई गिला विकवा नही,ये तो देवता रहा,
और कुछ दिन जी लेता,लेकिन ईश्वर का मर्जी नही रहा,
भले छोड गये हमसब को,लेकिन ये हमारे दिल मे रहा,
मुर्दे ये तमाशे देखा तो,सोचा भला हुआ कि जिन्दा ना रहा ।
मरने के बाद ही तारीफ की पुल,लोग बाँधता रहा,
जीते जी कभी ऐसी बातो को तो,सुनने से रहा,
दो मधुर शब्द सुनने को,जीवन भर तडपता रहा,
कंधे मे उठाये लोग सब और गुण मेरा गाता रहा ।
चुन्नू साहा पाकूड झारखण्ड












