
जलती रही है मशालें हाथ में,
मेरे दिल के जज्बात की,
कलम ने हुंकार भरी है ,
हर आदमी की आवाज की,
कविता , गीत , गज़ल गवाही देने वाले हैं यहां
दिलों की हर बात की,
धरती को हरियाली देता है अम्बर,
खुश्बू देती है पवन,
मोहब्बत में हम दीवाने हैं,
खुशहाली देता है मन,
तस्वीरों को बदला है हमने कलम से,
सूरत बदती है हमारी कलम ने ,
इस बार फिर से सारी कायनात की।।
अशोक सुमन भवानी मंडी (राज.)












