
मौत से बढ़कर भी एक सज़ा होती है,
अकेले बैठकर अपने बीते हुए पलों को याद करना,
जो पल कभी चेहरे पर मुस्कान लाते थे,
आज वही आँखों में नमी छोड़ जाते हैं,
कुछ लोग तो चले जाते हैं ज़िंदगी से,
मगर उनकी यादें कहाँ जाती हैं,
कभी हँसी थी जिन बातों में,
आज उन्हीं बातों पर दिल भर आता है,
वक़्त तो आगे बढ़ जाता है,
पर मन वहीं ठहर जाता है,
तस्वीरें तो वही रहती हैं, दीवारों पर टंगी,
बस उन्हें देखने वाले की आँखें बदल जाती हैं,
कभी जो घर गुलज़ार था हँसी से,
आज उसी घर में ख़ामोशी पल जाती है,
मौत शायद एक पल में सब ख़त्म कर देती है,
मगर बीती यादों की सज़ा इंसान को हर रोज़ थोड़ा-थोड़ा तोड़ती है…!!!
अब तो बस इतनी सी दुआ है,
जो चले गए वो जहाँ भी हों सुकून में हों,
और जो यादों में रह गए हैं,
वो हमेशा दिल में ज़िंदा रहें।
के वी












