
वो यादों में रह गए…
जाते-जाते पीछे ऐसा सूनापन छोड़ गए,
जिन्हें देखना अब नसीब में नहीं,
उनकी यादें सीने में उम्रभर के लिए छोड़ गए।
न जाने अब कहाँ तलाश करें उनको,
उनकी बातें, उनकी हँसी
आज भी सुनाई देती है…
कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं,
जो हर साँस के साथ उम्रभर खलते हैं।
कहते हैं, वक्त हर ज़ख्म को भर देता है,
पर कुछ अपनों की यादें ऐसी होती हैं…
जो वक्त के साथ मिटती नहीं,
बल्कि हर दिन और गहरी होती जाती हैं…।
घर की हर दीवार पर आज भी उनकी परछाई है,
बंद आँखों में भी उनकी ही सूरत समाई है,
वो हाथ जो सर पर रखते थे प्यार से,
आज भी उसी एहसास की कमी बहुत रुलाती है।
अब त्योहार आते हैं तो बस रस्म बनके रह जाते हैं,
क्योंकि जिनके बिना कुछ अच्छा नहीं लगता था, वो ही नहीं होते हैं…!
भगवान से बस यही दुआ है,
जहाँ भी हों वो, खुश हों, सुकून में हों,
और हमारी यादें उन्हें भी कभी-कभी
हमारी तरह ही सताती हों…!
के वी












