
रात के अंधेरे ने लिया है घेर
अकाश और जमीं को
कहीं भी रोशनी नजर नहीं आती
सभी तो कर रहे रोशनी की तलाश
हर सख्श जिधर भी देखो
एक मनहूस सी परछाई में हो गया है तब्दील
सभी तो घूम रहे जिधर भी बढ़ो
इस अंधकार में
सभी मिले बदहवास
सभी को रोशनी की तलाश
वक्त ये घड़ी जैसे रुक सी गई है
ऐसा वक्त भी आएगा…. जिस में सभी मिले
जो कर रहे रोशनी की तलाश
कब सुबह होगी
नहीं पता किसी को
ये रात लंबी हो गई है
….. कब तक करें सवेरे की तलाश
सभी राहें बंद नजर आती हैं
नींद तो मानो उड़ गई है
बस !
सभी को रोशनी की तलाश ।
महेश शर्मा,करनाल












