
कविता
चिट्ठी यां लिख लिख कर दर्द भी बताती थी सखीयां ,
दर्दे दिल का
हाल चाल सुनाती थी चिट्ठी यां,
मन की प्यास बुझाती रहीं हैं चिट्ठी यां,
मन का बाग होती थी चिट्ठी यां,
खुशहाली और शुभकामनाएं घर घर देती थी,
आपको हर बात बता देती थी चिट्ठी यां,
खुशियों का संदेशा लाया,
गम का पेगाम लाया,,
डाकिया डाक लाया,
डाकिया डाक लाया,
दादा जी उदास बैठा,
दादी मां को बिमारी ने हे खाया ,
सारी रात
बरसे सावन,भीगी भीगी आंखों से,,
गौरी का पेगाम लाया,
भाभी जी पीहर गई दो दो बच्चे साथ लेकर गई ,
भाई साहब ने काम धाम था छोड़ा,
खाना भंडारे में खाया,,
डाकिया डाक लाया,
डाकिया डाक लाया,
अशोक सुमन भवानी मंडी (राज.)











