
विधा – काव्य
लेखन भी अब एक फैशन हो गया है
छदम सम्मान का नाकाबिल एक जरिया हो गया है
लेखन कलमकारों की तन्हाई का एक आसरा होता है
दर्द दिल का खुद को जताने का एक सहारा होता है
दिल जब दुनियाँ से ख़फ़ा होता है
दर्द उसका शब्दों मे बयाँ होता है
स्वार्थ की दुनियाँ मे जब साया भी जुदा होता है
कसम की कसम कलम का साथ ही खुदा होता है
ज़ज़्बातों का जब तूफ़ान उठता है मन बेजां रोता है
दुनियाँ की बेवफाई को सीने मे पिरोता है
लेखन ज़ज़्बातों को साधने की शाब्दिक इजहार होता है
भावनाओ को शब्दों मे पिरोकर खुद से ही आत्मीयता का सरोकार होता है
भाव बिन लेखन अब दुनियाँ में व्यवसाय का आधार बन गया
लेखन में पीछे छिपे भाव आत्मीयता प्रेरकता अब दिखावा हो गया
दिलों से दिलों को जोड़ने का लेखन ही माध्यम था
एक दूजे के मर्म को समझने का ख़ूबसूरत संगम था
अब ना दिल है ना ज़ज़्बात ना किसी से किसी के रचनात्मकता का सरोकार
ज्ञानवाजी छदम नैतिकता का शागिर्द ये लेखन बन गया पैरोकार
लेखन क्या होता है पुता हुआ बस चेहरा दिखना चाहिये
ढोल ढपली राग का बस कोलाहल चाहिये
संदीप सक्सेना
जबलपुर म प्र











