
कविता
प्रेम की चाह रखने वालों,
पहले तुम प्रेम करना सिखो,
प्रेम रस बरसाती पानी नहीं,
पहले इस बरसात में भीगना सिखो,
अंधेरों में उजाला करने का हुनर सिखो,
किसी के जीवन में उजाले भरना सिखो।
खुश रहना है तो,खुब पैसा कमाओं,
सुकून से रहने के लिए दुआएं कमाना सिखो,
बरसात में नये फूल पत्ते आतें हैं और पतझड़ में झड़ जातें हैं,
इसी तरह हमारे बाद भी आएंगी नई पीढ़ीयां ,
उनके दिलों में जगह बनाने के लिए,
इतिहास लिखना सिखो ,
नभ में उड़ना चाहता है हर कोई,
खुब पढ़ो लिखो तुम,
आने वाली नस्लों कै लिए,
धरती पर पेड़ लगाना सिखो।।
निरस जीवन में खुशियां भरने को,
हृदय में प्रेम का बीज
उगाना सिखो।।
अशोक सुमन भवानी मंडी (राज.)











