
स्पेशल करवा चौथ
आज करवा चौथ का त्यौहार है,
केवल आज ही तो पति परमेश्वर है।
नशेड़ी निकम्मा कहीं आज न पीकर आए,
घर आइ के शराबी बिना बात करैगो रार है।।
आज इसकी आरती ढंग से उतारनी है,
नाशपीटो चाँद निकलने के बाद आतो है।
अगर फोन पै मोय नाँय बतातो है,
तो मारि-मारि लट्ठनु आरती उतारनी है।।
कुत्ता मोय कभी देवी मानिवे बारो नाँय है,
शॉपिंग की बात पै करतु आंय बाँय है।
कभी सीधे मुँह बात करिबे को तैयार नाँय है,
करवा चौथ बारे दिनु भी करतु काँय-काँय है।।
आजु जाकी सुनिहैं बू तौ परमेश्वर है,
नशेड़ी गंजड़ी हरामी जगदीश्वर है।
कल जाको भूतु उतारिबे की ही बारी है,
बेशक आजु लोकलाज में आरती उतारी है।।
सभी सज्जनों( कुँवारों को छोड़कर ) को करवा चौथ की बहुत – बहुत बधाइयाँ एवं हार्दिक शुभकामनायें।
डॉ. विश्वम्भर दयाल अवस्थी
विद्या – सागर ‘ वरिष्ठ कवि ‘
खुर्जा, बुलंदशहर (उ. प्र.)













