
विधा — कविता
चाँदनी रात सुहानी आई, करवा चौथ का पर्व, प्रेम, समर्पण, त्याग से महके, जीवन का हर गर्व।
सजकर बैठी सुहागिन नारी, हाथों में मेहँदी, पिया के नाम की खुशबू लेकर, आँखों में है बंदगी।
करवा लेकर पूजन करती, मन में शुभ अरमान, अटल प्रेम की डोर बाँधकर, करती पति का सम्मान।
चाँद निकलने की प्रतीक्षा, नयनों में विश्वास, छलनी से प्रियतम को देखे, जागे प्रेम की आस।
माथे पर बिंदिया दमके, चूड़ी करे शृंगार, प्रेम-सुधा से भर जाता है, घर-आँगन संसार।
सुख-दुख में संग चलने का, लेती मन में संकल्प, रिश्तों की मधुरिमा से खिलता, जीवन का हर कल्प।
प्रेम रहे, विश्वास रहे, खुशियों का हो वास, सात जन्मों तक साथ रहे, प्रेम रहे हर बार।
करवा चौथ का पर्व सिखाए, प्रेम अनमोल उपहार, सम्मान, स्नेह और समर्पण से, महके जीवन-संसार।
रचनाकार: कौशल













