
विषय-करवा चौथ
विधा- कविता
चाँदनी रात में सजा, करवा चौथ का त्योहार,
प्रेम, समर्पण और विश्वास का, खिलता अनुपम संसार।
माथे पर बिंदिया दमके, हाथों में मेहँदी प्यारी,
सोलह शृंगार से सजी हुई, लगे चाँद-सी न्यारी।
निर्जल व्रत की साधना में, प्रेम की ज्योति जलती है,
पति की लंबी आयु की खातिर, हर प्रार्थना निकलती है।
चूड़ियों की खनक सुनाती, रिश्तों की मधुर कहानी,
सिंदूर सजाकर माँग में, लिखती प्रेम की निशानी।
सास-बहू के स्नेह से महके, आँगन और चौबारा,
प्रीत के पावन बंधन ने, जीवन को सँवारा।
दिनभर की इस तपस्या में, विश्वास का उजियारा,
चाँद के आने की प्रतीक्षा, मन को लगे दुलारा।
जब छलनी से चाँद निहारें, प्रियतम का मुखड़ा देखें,
प्रेम भरे उन नयनों में, सपनों के दीपक लेखें।
चाँद गगन में मुस्काए, धरती पर खुशियाँ छाएँ,
पति-पत्नी के प्रेम-सुमन, जीवनभर मुस्काएँ।
सुख-दुःख में साथ निभाना, रिश्तों की सच्ची शान,
प्रेम, भरोसा और समर्पण से, महके हर इंसान।
करवा चौथ का पर्व सिखाए, प्रेम रहे अनमोल,
सात जन्म तक साथ निभे, मधुर रहें हर बोल।
रचनाकार
श्री नंदकिशोर गौतम
माध्यमिक शिक्षक
शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बकोड़ी
विकासखंड कुरई, जिला सिवनी, मध्य प्रदेश













