
विधा – काव्य
पति पत्नी के सात जन्मों से बंधा ये एक अटूट भावनाओं का असीम प्यार है
पति की लंबी उम्र के लिये उसकी भार्या का निर्जला व्रत करवा चौथ त्यौहार है
करवा माता की स्तुति का विधान है
चाँद देखकर ही वृत्त तोड़ना पत्नी का आराध्य वरदान है
माँ पार्वती ने भी भोलेनाथ को वापस पाने खातिर आराधना की थी
सतीत्व के श्रृंगार खातिर करवा माता ने भी यमराज को चुनौती दी थी
कुमकुम सिंदूर अक्षत तांबे के कलश में भरकर जल करवा माता का ध्यान होता है
छलनी से चांद देख सुहागिन का पति की लंबी उम्र का माता को स्तुति गान होता है
सुहागिन दिल से पति का ध्यान कर सोलह श्रृंगार करती है
पूरे दिन का कर धारण निर्जला व्रत पतिव्रता नारीत्व सार धरती है
पति पत्नी के जन्म जन्मान्तर साथ का ये एक नैसर्गिक ईमान होता हैं
साथ जिये साथ मरे बस ये ही इकलौता उस सुहागन का अरमान होता है
संदीप सक्सेना
जबलपुर म प्र













