
आदिकवि महर्षि वाल्मीकि जयंती एवं परिषद के स्थापना दिवस के अवसर पर जनपद इकाई लखीमपुर खीरी द्वारा छोटी काशी गोला गोकर्ण नाथ नगर में एक वैचारिक संगोष्ठी एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में अखिल भारतीय साहित्य परिषद (अवध प्रान्त) के प्रांतीय कार्यकारी अध्यक्ष डॉ.द्वारिका प्रसाद रस्तोगी जी उपस्थित रहे ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता जनपद के वरिष्ठ कवि श्रीकांत तिवारी “कांत” ने तथा संचालन गीतकार/गजलकार मुनेंद्र प्रताप “मंजुल” ने किया।
जनपद इकाई के जिला अध्यक्ष रमेश पाण्डेय “शिखर शलभ” ने कार्यक्रम के विषय में प्रकाश डालते हुए बताया कि यह परिषद का प्रमुख और अनिवार्य कार्यक्रम होने के साथ ही हमारी सांस्कृतिक साहित्यिक धरोहर, वैचारिक चेतना और महान मानवीय मूल्यों से जुड़ा आयोजन है। हमें अपने आदर्शों पर चलने के लिए प्रेरित करने वाले इस कार्यक्रम के लिए समय देना सार्थक ही सिद्ध होना है ।
वाग्देवी देवी मां सरस्वती व महर्षि वाल्मीकि जी के चित्र पर माल्यार्पण ,पूजन-अर्चन के पश्चात कार्यक्रम के अभिनंदनीय व्यक्तित्व पंडित विजय प्रकाश मिश्र “शास्त्री जी” को अंग वस्त्र,सम्मान पत्र उत्तरीय और माल्यार्पण कर उन्हें सम्मानित किया गया। बृजेश तिवारी “बृजेश”की वाणी वंदना से प्रारंभ हुए इस कार्यक्रम में जनपद इकाई के संरक्षक श्री कमलेन्द्र शुक्ल “दुर्वासा” ने अपने सामयिक कुंडलियां छन्दों की छटा से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
इसके बाद आए वरिष्ठ कवि व इकाई के प्रथम संरक्षक भगवती प्रसाद मिश्र “बेधड़क”
जी ने अपने हुण्डलिया छंदों के माध्यम से समाज मे व्याप्त
कुरीतियों व बुराइयों पर जम कर प्रहार करते हुए,हास्य-व्यंग्य की रचनाओं से सभी को तालियाँ बजाने पर मजबूर कर दिया।
हिंदी भाषा के प्रवक्ता,शब्दाक्षर संस्था के प्रदेश संगठन मंत्री शशिकांत मिश्र “शशि”ने मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम व श्री कृष्ण जी पर अपने मनमुग्धकारी छन्दों से प्रशंसा पाई।संचालक
मुनेन्द्र मंजुल नेट अपनी शानदार ग़ज़लों के दमदार प्रस्तुतीकरण से समाँ ही बाँध दिया। नगर के वरिष्ठ कवि/ से.नि. प्रवक्ता गेंदनलाल कनोजिया ने महर्षि वाल्मीकि जी की करुणा से उपजी कविता पर अत्यंत सार्थक विमर्श प्रस्तुत करती रचना से
सभी को रससिक्त कर दिया।
मुख्य अतिथि श्री द्वारिका प्रसाद रस्तोगी ने अपनी श्रेष्ठ
रचना जल के माध्यम से
पानी को परिभाषित करते हुए
उसके महत्व को रेखांकित किया।
अभिनन्दित/सम्मानित संस्कृत विद्वान श्री विजय प्रकाश मिश्र शास्त्री जी ने अपने उद्बोधन में महर्षि वाल्मीकि जी की वंशावली का वर्णन करते हुए आदिकवि के विषय मे प्रचलित मान्यताओं का खंडन किया।
उन्होंने बताया कि वाल्मीकि जी कश्यप ऋषि के नवम पुत्र वरुण के पुत्र व भृगु के भाई थे।ऐसे कुल का व्यक्ति अनपढ़ और एक क्रूर डाकू कैसे हो सकता है। उन्होंने वेद पुराणों के आधार पर श्लोकों के द्वारा अपने कथन को तर्कसंगत सिद्ध किया।
उनके सार्थक सारगर्भित उद्बोधन की सराहना सभी ने की।
जिलाध्यक्ष रमेश पाण्डेय “शिखर शलभ” नेअपने गीतों से जीवन में प्रेम की प्रधानता को प्रतिपादित करते हुए उसके शाश्वत और सात्विक रूप को अत्यंत मनमोहक रूप में प्रस्तुत किया।उनका गीत—
काम कर्तव्य का,नाम अधिकार का
है अनोखा बहुत रूप संसार का
प्यार में डूबकर देखना,सोंचना
अर्थ क्या जीत का,
मूल्य क्या हार का।।
उपस्थित जनों द्वारा बहुत ही सराहा गया।
अन्त में कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ ग़ज़लकार/व्यंग्यकार श्री श्रीकान्त तिवारी “कान्त ने
अपनी बेहतरीन ग़ज़लों व उनमे प्रयुक्त रदीफ़- क़ाफ़िया से सुधी श्रोताओं को चमत्कृत
करते हुए खूब वाहवाही लूटी।
उन्होंने समस्त साहित्यकारों का आभार प्रकट करते हुए
आयोजन के समापन की घोषणा की।













