स्वप्नों को जिसने दी उड़ान,
जग को सिखाया आत्मसम्मान।
धर्म, विज्ञान, विवेक का गान,
थे वो भारत की सच्ची शान।
शब्दों में जिनकी आग थी,
आँखों में सच्ची लगन जाग थी।
जिनकी वाणी बन गई दीपक,
अंधकार में थी जो मशाल सी।
“उठो, जागो” का मंत्र सुनाया,
हर बेजान में प्राण जगाया।
नवयुवकों को राह दिखाई,
खुद को जानो – ये बात सिखाई।
शिकागो में जो गर्जन किया,
भारत का गौरव चरम छू लिया।
हर भाषा, हर जाति से ऊपर,
मानवता को धर्म बता दिया।
गए नहीं, वो साथ हैं अब भी,
कण-कण में वो साँसें भरते।
उनकी स्मृति, उनका बलिदान,
हर युग में फिर से हमें संवारते।
स्वामी विवेकानंद जी को श्रद्धा सुमन अर्पित
डॉ बीएल सैनी
श्रीमाधोपुर सीकर राजस्थान













