
माटी के पुतले
कहीं भूल ना जा
राम नाम,,2
भूल ना जा,राम नाम,
माटी के पुतले
कहीं भूल ना जा
राम नाम ।।2
झूठे जग की झूठी माया
झूठी माया ,झूठी काया2
झूठा ये संसार ,
माटी के पुतले
भूल ना जा, राम नाम,2,
ये जग तो है, दो दिन का मेला,,
जो कुछ दिखता
सब झूठा झमेला,,
काहे को करें तू गुमान2
माटी के पुतले
भूल ना जा, राम नाम२
मैं और मेरा
तू और तेरा
ये ही तो है जंजाल२
कहे राजन,
तू भूल जा ,इनको,,,
ये ही तो है,मायाजाल2
माटी के पुतले
कहीं भूल ना जा,,
,राम नाम।।2
भूल ना जा, राम नाम
माटी के पुतले ,भूल ना जा
राम नाम,,,
राजेंद्र कुमार तिवारी मंदसौर ,मध्य प्रदेश













