
हमारे प्यार का सफ़र यूं जारी रहे,
हम सुख दुःख में साथ निभाते रहे।
हम तेरे कदमो से कदम मिलाते रहे,
बसंत के उत्सव हम यूं ही मनाते रहे।।
अगर कहीं लड़खडा़ऊं जरा,
हाथ मेरा तुम थाम के रखना।
चाहे सारे जहाँ मेंं बदनाम होऊं,
अपनी नजरो से ना गिरने देना।।
यह सफ़र तुम्हीं संंग शुरू हुआ,
निरंतर संग तुम्हारे यूं चलता रहे।
मन्नू हर रात तेरे संंग यूं बिते मेरी,
बस तेरे साथ ही सुर्योदय होता रहे।।
हमको संस्कारों का यूं सार मिले,
नित ज्ञान का हृदय मेंं दीप जले।
गौतम बुद्ध की इस पावन धरा से,
हम लेकर मानवता का पैगाम चले।।
चाहे सावन की वो बरसात हो,
नित गर्मी की चाहे यहाँ लू चले।
चाहे संग बसंंत की मदहोसी हो,
हमें पतझड़ में भी तेरा साथ मिले।।
नित गीत खुशी के गाती रहे,
यूंं कोयल सी राग सुनाती रहे।
पायल की झनकार उडा़ती रहे,
मन्नू हंंसती रहे,हमें हंसाती रहे।।
स्वरचित,मौलिक एवं अप्रकाशित है।
मुन्ना राम मेघवाल।।
कोलिया,डीडवाना,राजस्थान।
Bhatimunnaram921@mail.com













