
अतुलित बलवान,सकल गुणों की खान।
मात अंजना के पुत्र,वीर हनुमान हैं।
राम नाम करें जाप,हरें जग के संताप।
त्याग तपस्या की मूर्ति, करुणानिधान हैं।
सर्व सिद्धियों के दाता, चारों वेदों के हैं ज्ञाता।
तीव्र वायु के समान,आप गतिमान हैं।
राम नाम अति प्यारा,जिस नर ने उचारा।
हो प्रसन्न हनुमत, देते वरदान हैं।।
शिव अंशा अवतार,सकल सृष्टि आधार।
बल बुद्धि ज्ञानपुंज,रवि के समान हैं।
कपिपति रामदूत,बल तन में अकूत।
ज्ञानियों में अग्रगण्य, स्वयं ब्रम्हज्ञान हैं।
राम सिय अति प्यारे,माँ अंजना के दुलारे।
सर्वव्यापी चिरंजीवी,भूत वर्तमान हैं।
करे जो भी नित ध्यान, देके बल बुद्धि ज्ञान।
हर, हर पीड़ा लेते, मेरे भगवान हैं।।
स्वरचित रचना-राम जी तिवारी"राम"
उन्नाव (उत्तर प्रदेश)













