Uncategorized
Trending

देवशयनी एकादशी कहा जाता है

एकादशी महत्वपूर्ण तिथि होती है,
वर्ष में चौबीस एकादशी होती हैं,
अधिकमास या मलमास आता है,
तब एकादशी छब्बीस हो जाती हैं।

आषाढ़ शुक्ल पक्ष एकादशी को
देवशयनी एकादशी कहा जाता है,
इस तिथि को पद्मनाभा व हरिशयनी,
एकादशी के नाम से जाना जाता है।

इस दिन श्रीहरिविष्णु की योगनिद्रा,
यानी चातुर्मासा शुरू हो जाता है,
इस दिन से चार माह तक भगवान
विष्णु जी का शयनकाल चलता है।

इस दौरान मांगलिक कार्य विवाह,
मुंडन, गृह प्रवेश आदि नहीं होते हैं,
एकादशी के दिन बड़े बुजुर्गों को,
पूरा मान और सम्मान दिया जाता है।

इस दिन सात्विक भोजन करते हैं,
तामसिक चीज़ें सेवन नहीं करते हैं,
इस दिन तुलसीदल नहीं तोड़े जाते हैं,
तुलसी माँ की पूजा अर्चना करते हैं।

शंखासुर दैत्य का वध करके इसी
दिन भगवान विष्णु चार मास तक
क्षीरसागर में शयन करने जाते हैं,
व देवोत्थानी एकादशी को जगते हैं।

आदित्य शास्त्रों पुराणों के अनुसार
इस दिन भगवान विष्णु ने वामनरूप
में राजा बलि से तीन पग दान मांगे थे,
राजा बलि ने पीठ पर पैर रखवाये थे।

डा० कर्नल आदि शंकर मिश्र ‘आदित्य’, ‘विद्यावाचस्पति’
लखनऊ – 06 जुलाई 2025

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *