
आज इंसान लक्ष्य से भटक रहा है,
यही भटकाव सबको थका रहा है,
इस भटकाव की कथा लिख रहा हूँ,
मालिक व श्वान का हाल बता रहा हूँ।
घर से खेतों की दूरी खास नहीं है,
मालिक नहीं कुत्ता थक जाता है,
मालिक सीधे रास्ते से घर आता है,
पर कुत्ता चक्कर लगाकर आता है।
जैसे ही उसे दूसरा कुत्ता नजर आता,
वह उसके पीछे दौड़ने लगता है,
वर्तमान में देखा जाए तो यही स्थिति
आज हम सब इंसानों की हो गई है।
जीवन के लक्ष्य तक पहुंचना तो यूँ,
कठिन नहीं है, लेकिन राह में मिलने
वाले लोग इंसान को उसके जीवन
की सीधी-सरल राह से भटका रहे हैं।
लक्ष्य प्राप्ति में सबसे बड़ी बाधा है,
कि ऊर्जा राह के लोग बर्बाद करते हैं,
इसलिए इनको नज़रंदाज़ करते हैं,
लक्ष्य प्राप्ति के लिये सीधे बढ़ते हैं।
एक दिन मंजिल तो मिल जाना है,
इनके चक्कर में पड़े, थक जाना है,
आदित्य यह सोचना कि किसान की
सीधी राह या कुत्ते की राह चलना है।
डा० कर्नल आदि शंकर मिश्र
‘आदित्य’, ‘विद्यावाचस्पति’
लखनऊ












