
झूम झूम कारे कारे बदरा बरसे सारी रात, पुरवा और पछुआ में होड़ मचे सारी रात।
तन आतंकित, मन भयभीत।
झूम झूम कारे बदरा बरसे सारी रात,
पुरवा और पछुआ में होड़ मचे सारी रात।
भूखे प्यासे बच्चे छिप जाते मां के गात,
चूल्हा जले कैसे बारिश की रात।
झूम झूम कारे बदरा बरसे सारी रात,
पुरवा और पछुआ में होड़ मचे सारी रात।
पेट की आग बुझे कैसे बारिश की रात,
खुले आसमान के नीचे हैं बसेरे।
झूम झूम कारे बदरा बरसे सारी रात,
पुरवा और पछुआ में होड़ मचे सारी रात।
जिएं कैसे बारिश की रात।
जिएं कैसे बारिश की रात।।
संध्या दीक्षित













