
उसकी चुप्पी उसकी कमज़ोरी नही,पर बोलेगा तो देखना वह बोलता रह जाएगा,
पूछते हो क्यूं तो कोई जवाब तो नही देगा वह, शोर नही मौन,बस मौन रह जाएगा।।
क्यूंकि
किताबो के वर्को की तरह पलटता नही है अब, कोई,
इतनी दूर कर आए सफ़र, और पूछे भी,तो कौन गोई ।।
बात अगर मेरी है,तो मुड़ा हुआ इक पेज हूँ,मैं,
छोड़ा था बरसो पहले,वही तो स्वेद हूँ मैं।।
बुकमार्क भी जा गिरा ,जब उठाया बंद किताब को,
कौन ही पूछेगा आगे, कहानी के हालात को।।
फिक्र जिसका करना था,उसने तो पढ़ा इक पेज नही,
फिर क्या ही बात और कहे,जिक्र जब करना नही।।
यह सफेद से कीटों का अब घर सा बन जाएगी,
कौन जाने कैद को,कौन कहानी रह जाएगी।।
और दिन कुछ बीतने पर,कबाड़ी कोई ले जाएगा,
बिन पढ़े ही किताब का सफ़र खत्म हो जाएगा।।
तुम समझे या कि नही,यह कौन सी किताब है,
जीवन है सभी का सरल और यूँ ही खत्म हो जाएगा।
संदीप शर्मा सरल ।।
देहरादून उत्तराखंड ।।












