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साहित्यकार डॉ अभिषेक कुमार द्वारा लिखित पुस्तक गिरवी ज़मीर का शीघ्र विमोचन।

ब्लॉक मिशन प्रबंधक ठेकमा सह विख्यात साहित्यकार डॉ. अभिषेक कुमार द्वारा लिखित पुस्तक “गिरवी ज़मीर” का लेखांकन पूरा हो गया है और वह शीघ्र विमोचन होने हेतु तैयार है। पुस्तक अभी बाजार में आई नहीं है परंतु पाठकों में इसे पढ़ने का उमंग अभी से देखा जा रहा है।

भारतीय ग्रामीण राजनीति की कड़वी सच्चाई को उजागर करती व व्याप्त भ्रष्टाचार तथा नैतिक पतन को मार्मिक ढंग से चित्रित करती गिरवी ज़मीर शीर्षक तले कहानी उत्कृष्ट लेखन का नमूना है। वारंगल, तेलंगाना के शिक्षक डॉ. यल. कोमुरा रेड्डी की समीक्षा के अनुसार, यह कहानी एक ईमानदार पान विक्रेता रामचेत के ग्राम प्रधान बनने की यात्रा के माध्यम से सत्ता की लालसा और ज़मीर के साथ समझौते को दर्शाती है।

कहानी में इर्द गिर्द के पत्रों के नैतिकता का ह्रास, चुनावी तिकड़मों में उनकी उलझन, और सत्ता के बाद भ्रष्टाचार और लालफीताशाही से उनकी हताशा को बखूबी चरित्र चित्रण किया गया है। कलावती और उनकी बेटी गुड़िया के पात्र भावनात्मक गहराई जोड़ते हैं, जबकि झुमन सेठ जैसे चरित्र सामाजिक शोषण को उजागर करते हैं।

“गिरवी ज़मीर” भारतीय लोकतंत्र की खोखली सच्चाइयों का दर्पण है, जो पाठकों को प्रजातांत्रिक मूल्यों और नैतिकता पर आत्म-चिंतन के लिए प्रेरित करती है। यह कहानी समाज और राजनीति के स्याह पक्ष को बेनकाब कर एक स्वच्छ साफ सुथरा राजनीति और बेहतर भविष्य की आवश्यकता पर बल देती है।

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