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सम्मान

किसी को धन से मिलता तो,
किसी को पद से मिलता है।
किसी जगत में तब मिलता है,
जब उनके हृदय में कमल मिलता है।।

किसी को गुलामी करने तो,
किसी को चापलूसी करने में।
किसी को पद पखारने में तो,
किसी को किसी से डरने में।।

किसी को शत्रुता करने में तो,
किसी को आघात सहने में।
किसी को मेहनत करने में तो,
किसी को कुछ न कुछ लिखने में।।

किसी को पुजारी बनने में तो,
किसी को प्रवचन करने में।
किसी को यज्ञानुष्ठान करने में,
तो किसी को पेट भरने में।।

किसी को यात्रायें करने में तो,
किसी को पहाड़ चढ़ने में।
किसी को तैरने में तो किसी को,
फुटबॉल और कुश्ती लड़ने में।।

किसी को कबड्डी खेल और किक्रेट में,
तो किसी को पाठ-पूजा करने में।
किसी को न्यूज पेपर में कुछ निकलने में।
किसी को पत्रकार बनने में तो,
किसी को अन्तरिक्ष में सैर करने में।।

किसी को जितेन्द्रिय बनने में तो,
किसी को साधू-सन्यासी में।
किसी को योग साधना और वेद-पुराण पढ़ने-सुनाने में,
तो किसी को नया-नया कुछ गढ़ने में।।

रचना
पं० जुगल किशोर त्रिपाठी (साहित्यकार)
बम्हौरी, मऊरानीपुर, झाँसी (उ०प्र०)

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