Uncategorized
Trending

महादेवी महागौरी

श्वेत शंख सी काया तेरी,
ज्योतिर्मय है रूप।।
शांत, सौम्य और मनोहारी,
जैसे निर्मल धूप।।

चतुर्भुजी माँ धारण करती,
डमरू और त्रिशूल,
श्वेत वृषभ की करती सवारी,
देती खुशीयों के फूल।।

​तपस्या से तपा शरीर,
शिव को पाने की थी चाह,
इसलिए हुई गौरी मां तूम,
तुमने तय की कठिन राह।।

तेरे दर्शन से मिलते हैं,
जीवन के सब सुख,
मिट जाते हैं कष्ट सभी,
धुल जाते हैं सब दुःख।।

​आठवीं शक्ति तू नवदुर्गा की,
मोक्ष का द्वार है खोलती,
भय मिटाकर भक्तों के मन का,
प्रेम की भाषा बोलती।।

कल्याणकारी, शुभ्र वस्त्रधारिणी
करती सबका उद्धार,
नमन है तुझको, महागौरी,
तेरा अनंत उपकार।।

श्वेत शंख की काया तेरी,
ज्योतिर्मय है रूप।।
शांत सौम्य और मनोहारी,
जैसे निर्मल धूप।।

    रीना पटले (शिक्षिका)
        सिवनी (मध्य प्रदेश)
                 भारत

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *