
तुम्हें सब याद करते हैं—
मैं और मेरा प्यार,
मेरी यादें, तेरी बातें,
और मेरे घर का हर कोना-कोना।
पलंग, कुर्सी, टेबल, डाइनिंग,
किचन के बर्तन सारे,
टीवी, रेडियो, ए.सी., पंखा—
सब तुम्हें याद करते हैं।
उस कमरे का चुपचाप खड़ा आईना,
जिसमें तुम खुद को निहारा करती थीं,
टकटकी लगाए आज भी रास्ता देखता है—
कि तुम कब आओगी।
तुम्हें सब याद करते हैं—
मेरी धड़कनें, मेरी साँसें,
मेरी बातें, मेरे आँसू और मेरी आँखें।
दीवारें, छत, खिड़कियाँ,
और तुम्हारे कमरे की अलमारी—
अब भी तेरे बदन की खुशबू समेटे हुए,
तेरे होने का एहसास कराती हैं।
मुझे सब याद आता है—
तेरा रूठना, गुस्सा होना,
फिर अपने आप मान जाना,
और मेरी बातों को मुस्कुरा कर टाल जाना।
आर एस लॉस्टम













