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जय राम

हरि अनंत हरि कथा अनंतः ,चहुँ युग गाथा वीर हनुमंतः ,
राम सिया राम, सिया राम जय जय राम।। (2)

अंजनि पुत्र केसरी नंदन, हरते दुख,ये दुख हरभंजन ,
राम सिया राम, सिया राम जय जय राम।। (2)

जब जब पीर पड़ी संतन पर, संकट हरते हरि के जन बन।
राम सिया राम, सिया राम जय जय राम। (2)

अहिरावण जब राम हर लीन्हा,तब पंचमुखी अवतार तुम लीन्हा,
राम सिया राम सिया राम जय जय राम ।।(2)

तंत्र मंत्र से राम सुलाए, जाकर उन्हे पाताल छिपाए,
राम सिया राम सिया राम जय जय राम।।(2)

पांच दीप जलते वहा थे,अहिरावण के जिनमे प्राण थे,
राम सिया राम सिया राम जय जय राम। (2)

और दिशा भी अलग थे जलते,बुझने पर ही राम थे जगते,
राम सिया राम सिया राम जय जय राम।।(2)

देखा जब संकट प्रिय रामः,पंचमुखी अवतार तब थामा,
राम सिया राम सिया राम जय जय राम।।(2)

एक बार मे दीप बुझाई, संकट मुक्त किए रघुराई,
राम सिया राम सिया राम जय जय राम। (2)

पांच मुख भी देवन लीन्हा, बीच मे मुख निज अपना कीन्हा,
राम सिया राम सिया राम जय जय राम ।।(2)

नरसिंह मुख दक्षिण मुख कीन्हा, बुरी शक्ति से राम हर लीन्हा,
राम सिया राम सिया राम जय जय राम।।(2)

पश्चिम को मुख गरूड था कीन्हा, बाधाओं से छीन था लीन्हा,,
राम सिया राम सिया राम जय जय राम ।।(2)

वराह मुख उत्तर मुख लीन्हा, स्थिरता की ऊर्जा से जीम्हा,
राम सिया राम सिया राम जय जय राम ।।
(2)

अश्व मुख अजेयता को लीन्हा, जीत प्रतीक, सुनिश्चित कीन्हा,
राम सिया राम सिया राम जय जय राम ।।(2)

कथा हनुमान की एक सुनाई, ऐसी कथा अनंत रघुराई ,,
राम सिया राम सिया राम जय जय राम ।।
(2)

अतुलित बलधामं,, हेम शैलाभदेहं
दनुज वन,कृशानु स्नेहं,,
राम सिया राम सिया राम जय जय राम ।।
*(2)

ज्ञानिनाम, ग्रगण्यम, महाबल, सकलगुण निधानं वानराणामधीशं,
राम सिया राम सिया राम जय जय राम ।।(2)

रघुपति,प्रिय भक्तं,वातजातं नमामि, हनुमान जी की अनेक कहानी,
राम सिय राम सिय राम जय जय राम।।

सरल कहे सरल सी वाणी,हनुमान की शक्ति बखानी,
राम सिया राम सिया राम जय जय राम ।।
(2)

सौ सौ मुख होय जो कागा, कहत सुनत मिटत सब बाधा,
राम सिया राम सिया राम जय जय राम ।।
(2)

संदीप शर्मा सरल
देहरादून उत्तराखंड

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