Uncategorized
Trending

मैं एक किताब हूँ

शायद मैं वह किताब हूँ ,जो पढ़ी नहीं जा सकती ।

किसी के द्वारा प्यार से, गढ़ी नहीं जा सकती।

शायद मैं वो किताब हूँ ,
जिसकी भाषा आसान की नहीं जा
सकती ।

अब लफ्जों की भाषा भी तो समझी नहीं जा सकती ।

सुकून कम है ,कश्मकश ज्यादा,

इसीलिए शायद पढ़ी नहीं जा सकती।

शायद मैं एक बंद किताब हूँ,
जो खोली ही नहीं जाती।

जिसकी वास्तविक कहानी,
समझी नहीं जा सकती ।

यह वो किताब है ,जिससे परेशानियां बढ़ ही जाती ।

हर बार यह किताब, खामोश ही हो जाती ।

शायद मैं वह किताब हूँ,जो पढ़ी नहीं जा सकती ।

किसी के द्वारा प्यार से, गढ़ी नहीं जा सकती।


अदिष्ठा दास
क्लास – 11th
विकासखंड बसना
जिला महासमुंद छत्तीसगढ़

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *