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अतुकांत कविता

जब भी किसी से बोलिए
शब्दों को पहले तोलिए।
तुम जो न सह सको कभी
वो बोल क्यों कर बोलिए?
बगिया ही तो यह जीवन
सुंदर सा है यह उपवन।
कांटों से चुभते बोल क्यों?
क्यों कठोर सी हो चितवन?
चार दिनों का यह जीवन
हो सुभाव सबै मन भावन।
ये जीवन है आवन जावन
बोलो मीठे बोल सुपावन।
शब्द करारे देते घाव
शब्द से ही बनता लगाव,
फूलों से है नाजुक दिल
टूटे तो जीवन मुश्किल।
सुलेखा चटर्जी













