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लिखूँ भी तो क्या खास लिखूँ

लिखूँ भी तो क्या खास लिखूँ
कौनसी ऐसी बात लिखूँ
आता नहीं मुझे कुछ लिखना
हाँ,तुझको जिंदगी की सौगात लिखूँ l

जब भी देखती हूँ सूरत तेरी
खुद को बना लेती हूं मूरत तेरी
मेरे सपनों के सौदागर तो नहीं तुम
हाँ दिल कहता है सुमि का, तुझको अपनी चाहत लिखूँ ll

अच्छा सुनो ना
यूँ छुप छुप कर ख़्वाबों में क्यों चले आते हो
नींद भी मेरी,क़रार भी मेरा,इरादों में लूटकर जाते हो ll
कभी तो बादल बन कर बरस जाया करो
हाँ अपने गीतों में तेरा नाम मोहब्बत लिखूँ  ll

आहिस्ता आहिस्ता हर अहसास सँवारा है
जानती हूँ कैसे अपनी दुआओं में मांगा है
सजदा किया है इस दिल ने तेरे हर ख़याल
कैसे बताऊँ इस तरह हालातों में, अपने दिल की हालत लिखूँ ll

मीना रावलानी
कोटा राजस्थान

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