
कितनी अनमोल है,
पेड़ पौधों की ये गूंज।
जिम्मेदारी समझो अपनी,
आँखें न मूंद।
पेड़ लगाओ,
पेड़ बचाओ,
यूं न कटाओ,
यूं न हटाओ।
पेड़ पौधों की ये गूंज।।
पेड़- पौधें लगेंगे,
पर्यावरण सुरक्षित होगा।
सुध होंगी हवा,
तो जीवन होगा सफल।।
तभी होगी पेड़ पौधों की ये गूंज। बडेगे पेड़ पौधें से वन,
तभी सुरक्षित होगा पर्यावरण।। तभी होगी पेड़ पौधों की ये गूंज। लौटेंगे मौसम सुहाने से,
वन बड़ेंगे पेड़ पौधों लगाने से। साथ तेरे चल दे,
जो ऐसे साथी ढुंढ।
कितनी है अनमोल वन की हर गूंज।।
कविता रचनाकार- नंदकिशोर गौतम (माध्यमिक शिक्षक)
शास. उ. मा. विद्यालय बकोडी
जिला सिवनी (म.प्र.)













